------ अक्सर कुछ पंक्तियां मानस पटल को उद्वेलित करती हैं कि जीवन सुख दुख का संगमहै लेकिन जब यहां यथार्थ से सामना होता है तब अनुभव अति कटु होता है और जीवन मूल्य सामने आते हैं एक ऐसा ही अनुभव मेरे साथ दिनांक 27 जनवरी को हुआ कि दिन में परिवार में एक सुकन्या का आगमन हुआ जिससे एक खुशी का माहौल था और सब लोग बड़े प्रसन्न थेयह खुशी अनमोल थी और 8:00 बजे 13 वर्षीय बालक ने कहते हुए कि मैं जीना चाहता हूं मरना नहीं चाहता मार्मिक वाक्य के साथ दम तोड दिया और अगले दिन माननीय न्यायालय में जबाव दाखिल करना था मेरे पटल सहायक ने दुर्घटना से अवगत कराया और माननीय उच्च न्यायालय ने इससे सहानु.भूतिपूर्वक अगली डेट देदी Iशेक्सपियर का वाक्य टूडू और नॉट टू डू जैसी सिचुएशन पैदा कर दिया और ऐसे समय मैनेजमेंट गुरु तुलसीदास जी की शरण में जाने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं भगवान श्री राम जी का विवाह और राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त देख कर ही किया गया था , फिर भी ना वैवाहिक जीवन सफल हुआ और ना ही राज्याभिषेक। और जब मुनि वशिष्ठ से...